भगवद् गीता विचार


*|| भगवद् गीता विचार ||* हाथ से गांडीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी बहुत जल रही है तथा मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है, इसलिए मैं खड़ा रहने को भी समर्थ नहीं हूँ। *अध्याय- 1 श्लोक- 30* Download Bhagavad Gita App:

Create your website with WordPress.com
Get started
%d bloggers like this: