भगवद् गीता विचार

*|| भगवद् गीता विचार ||* इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती। इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाती है। *अध्याय- 2 श्लोक- 59* Download Bhagavad Gita App

By Badulescu Radu

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