भगवद् गीता विचार

*|| भगवद् गीता विचार ||* जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित हुआ उस-उस शुभ या अशुभ वस्तु को प्राप्त होकर न प्रसन्न होता है और न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि स्थिर है। *अध्याय- 2 श्लोक- 57* Download Bhagavad Gita App

By Badulescu Radu

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