भगवद् गीता विचार


*|| भगवद् गीता विचार ||* तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो। *अध्याय- 2 श्लोक- 47* Download Bhagavad Gita App


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