भगवद् गीता विचार


*|| भगवद् गीता विचार ||* जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुख को समान समझकर, उसके बाद युद्ध के लिए तैयार हो जा, इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को नहीं प्राप्त होगा। *अध्याय- 2 श्लोक- 38* Download Bhagavad Gita App

,

Create your website with WordPress.com
Get started
%d bloggers like this: